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चौपाल

                
                                                         
                            पहले चौपाल हुआ करती थी
                                                                 
                            
किसी मुद्दे से बात
शुरू हुआ करती थी
बुजुर्गो को मान तो
छोटे का सम्मान
किया करती थी
जब चौपाल हुआ करती थी
अब वक्त बदल गया
लोग बदल गये
चबूतरा चौपाल का
देखो उजड़ गये
कहाँ कोई अब मिल पाता है
बात मन की बतिया पाता है ?
पर सिलसिला वहीँ
जारी आज भी
सब है
चौपाल नहीँ तो ना सही
सबके पास वटसएप है
सबके पास वटसएप है ॥




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7 वर्ष पहले

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