भीड़ चली जा रही है
भीड़ !
और उस भीड़ में
हम और तुम भी ,
बाते करते है
बहस करते है
नये किसी मुद्दे पर
गहन करते है
कुछ लड़ते -झगड़ते
आपस में
फिर अपने- अपने घर
चल पड़ते है
निकलना भला कौन चाहता है भीड़ से ?
पहल करना कहाँ चाहते है
भीड़ की आदत सी पड़ गयी है
अक्सर भीड़ में हम रहते है
पर कोई चलता है ज़रूर
भीड़ से निकल कर
हम सबसे ,
अलग -थलग रहकर
निडर पथ प्रवर्तक बनकर ॥
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