तुम धरा नहीं हो,
न ही कोई चाँद,
और न ही महकता फूल🌺
मैंने इन सबको
बहुत पास से परखा है,
और हर दफ़ा यही महसूस हुआ—
तुम इनमें से
कुछ भी नहीं हो।
तुम सिर्फ 'तुम' हो।
वही अनोखे 'तुम',
जिनकी मौजूदगी से
फूलों में रंगत आती है,
नदियों में रवानी,
और चाँद को
देर तक निहारने का दिल करता है।
इस पूरी कायनात की खूबसूरती
सिर्फ तुम्हारे होने से है।
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