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इसीलिए तुम से लिपटा रहूँ सुबह-शाम तक।

                
                                                         
                            तुम इतनी खूबसूरत हो...
                                                                 
                            
अपनी खूबसूरती का राज बताओगी क्या?
क्या लगाती हो बदन में अपने,
कि तुम चाँद से भी प्यारी लगती हो।
तुम्हारी महक मुझमें बस जाती है,
तुम इतनी रसीली महक कहाँ से चुराकर मेरे लिए लेकर आती हो?
मन करता है तुम्हें सीने लगाकर
तुममें विलीन हो जाऊँ,
कोई ढूँढे तो मुझे सिर्फ तुममें नजर आऊँ।
तुम्हारी नशीली आँखों का जादू
मेरे दिल में कुछ-कुछ करता है,
मेरी इच्छा होती है तुम्हारी नशीली आँखों में डूब जाऊँ।
तुम्हारी जुल्फें, तुम्हारे होंठ
मेरे दिल से कुछ बयाँ कर जाते हैं...
तुम मुस्कुराकर मुझसे बातें करती हो,
तुम मुझसे कुछ छुपाती हो,
पर तुम्हारी आँखें सब कुछ बताती जाती हैं।
बदन तुम्हारा चंदन सा,
तुम्हारे प्रति मैं साफ सा...
तुम मुझे अपनी महक में विलीन कर दो,
इसीलिए तुम से लिपटा रहूँ सुबह-शाम तक।
— एस.टी.डी. मौर्य 
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4 घंटे पहले

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