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प्रेम का 'पृष्ठ' , पोषण

                
                                                         
                            प्रेम का क्या ?
                                                                 
                            
आप उसे तो
भलीभांति जानते हो!
उसके पीछे की वजह भी
आगे का कारण भी
आप सब जानते हो
प्रेम क्यों करते है
उसका कारण भी जानते हो

क्यों हुआ , किससे हुआ
प्रारंभ क्या और कैसा रहा
जो एकबार हुआ
जितना बढ़ा, बढता रहा
आपका प्रेम भी तो
आपने महसूस किया होगा
अपने ही प्रेम से बंधा
ठग का कोई जुड़ाव
देखना आपका ठग
अपने प्रेम करने में नजर आएगा

कभी ये पूछना स्वयं से
प्रेम की क्या वजह रही
जब भी टटोलोगे
प्रेम की पीठ को तो
एक दिन सामने आ जाएगा
प्रेम के बहुरूप में
जिसने ज्यादा प्रेम प्रदर्शन किया
समझो उतना ही बड़ा , वो ठग होगा
अपने प्रेम की पीठ से
स्वयं को पलटकर देखना
वो नजर आ जाएगा

जैसा भी हो
जो भी हो
ये प्रेम का अतिरेक है
कुछ तो विशेष होगा
प्रदर्शन, मिश्री सी बातें
आंखों से सहमति
बातों में गर्दन का झुकाव
हां में हां, मधुर मुस्कान
हास्य रस की मुखाकृति में
भला , भोला नज़र आएगा
जरा इधर उधर देखने पर
कुछ खास प्रभाव से
आपको प्रभावित कर
बातों की महिमा, गुणगान से
रस की बरसा, बरसायेगा
अद्भुत, अकल्पनीय,
मनोहारी सम्पूर्णता से
दृश्य में बहुत रोचकता होगी
वो एक दिन होगा
जब प्रेम आपका
अतिरेक से संयुक्त हो जाएगा
ठग वहां बेकाबू हो जाएगा
बाकी फिर क्या कहना
पृष्ठ के आगे पतंग में
अतिरेक से बंधी प्रेम की डोर है
वो.... उसी प्रेम से उड़ाएगा ।।
- शिव
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11 महीने पहले

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