मत ढोंग-पाखंडों में पड़कर जीवन बर्बाद करो,
कितना भी संघर्षमय जीवन हो, फिर भी तुम पढ़ो।
शिक्षा से बढ़कर धन नहीं, इस सत्य को पहचानो।
खर्च करो इस धन को जितना, उतना ही बढ़ा मानो।
मजदूरी करके भी थोड़ा पढ़ने को समय देना,
बच्चों के उज्ज्वल भविष्य हेतु कुछ कष्ट भी सह लेना।
एक समय की रोटी खाकर, कुछ पैसे बचा लेना,
अपने हिस्से की खुशियाँ भी बच्चों पर लुटा देना।
शिक्षा से बढ़कर जग में कोई उपहार नहीं होता,
ज्ञान का दीपक जल जाए तो जीवन अँधियार नहीं होता।
थाली बिक जाए तो हाथों से भोजन कर लेना,
प्यास सताए राहों में तो कुछ पल धीरज धर लेना।
सौभाग्य हमारा है, शिक्षा का अधिकार मिला,
अज्ञान के अंधकार में ज्ञान का उजियार मिला।
लिख-पढ़कर कुछ बन जाओ, अवसर मत गँवाना,
जीवन के इस अनमोल समय को व्यर्थ न जाने देना।
माता-पिता के त्याग को तुम अपना सम्मान समझना,
उनके अमृतमय आशीषों को जीवन का वरदान समझना।
जो बीत गया, उसे भूलो, जो मिला, उसे स्वीकार करो,
शिक्षा के बल पर अपना जीवन भी खुशहाल करो।
धन-दौलत छिन सकती है, छिन सकता है मान,
लेकिन ज्ञान की पूँजी से बढ़ता है इंसान।
न चोरी हो, न बँटवारा, न कोई इसे मिटा पाए,
शिक्षा वह अनमोल धरोहर, जो हर संकट में काम आए।
उठो, सँभालो कलम को, अपने सपनों को साकार करो,
मेहनत, लगन और ज्ञान से जीवन का उद्धार करो।
खुद पढ़ो, बच्चों को पढ़ाओ, घर-घर अलख जगाओ,
शिक्षा की उजली किरणों से जग को रोशन बनाओ।
याद रखो, ऐ मानव! शिक्षा ही सच्चा धन है,
इसके बल पर ही उज्ज्वल होता जीवन का हर क्षण है।
-सूबा लाल ‘अंजाना’
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