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सीखने की सीमा नहीं

                
                                                         
                            सीखने वालों ने ही शुरू की अपनी जिंदगी,
                                                                 
                            
हर कदम पर कुछ नया सिखाती है जिंदगी।
गिरते हैं, उठते हैं, सँभलते हैं सभी,
ठोकरों से राह नई दिखाती है जिंदगी।

धन-दौलत, मान-सम्मान सब यहीं रह जाएगा,
साथ केवल कर्म और सीख ही जाएगा।
जिसने समझा समय को, वही समझदार है,
हर अनुभव जिंदगी का अनमोल उपहार है।

कभी सुख ने सिखाया, कभी दुख ने सिखाया,
कभी अपनों ने, कभी गैरों ने समझाया।
कभी हार ने बताया जीत का रास्ता,
कभी आँसू ने हँसने का मतलब बताया।

जिंदगी कम पड़ गई, सीख पूरी न हुई,
उम्र ढलती रही, मगर चाह अधूरी न हुई।
जब तक साँस चले, सीखते रहो सभी,
क्योंकि जिंदगी छोटी है, सीख बहुत है अभी।

अंतिम साँस तक मन में जिज्ञासा रहे,
हर नए सवेरे में कुछ सीखने की आशा रहे।
खत्म हो जाए जिंदगी, तो शिकवा न रहे—
“जीवन मिला था, मगर जीना न सीखे।”

जिंदगी कोई मंजिल नहीं, एक सफर है,
हर मोड़ पर छिपा हुआ नया सबक है।
जो सीखता रहा, वही सच में जीता रहा,
जो रुक गया सीखने से, वह जीते जी रीता रहा।
-सूबा लाल "अंजना"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
43 मिनट पहले

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