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रात भर तेरी याद आई

                
                                                         
                            किसी की याद में आँखों में भर गए आँसू,
                                                                 
                            
रात भर नींद न आई, न कोई ख़्वाब आए।
तेरी सूरत ही छाई रही रग-रग में,
तेरे सिवा कोई अपने नज़र न आए।

रात अपनी कालिमा भी न दिखा पाई,
आँखों में तेरी ही रही परछाईं।
बादलों-सा दर्द पलकों पर छाया रहा,
दिल तुझे याद करके अश्रु बहाता रहा।

चाँद निकला मगर चाँदनी उदास रही,
हर घड़ी दिल को बस तेरी ही आस रही।
राह तकते रहे हम तेरे आने की,
हर आहट लगी जैसे तेरे आने की।

रात बीती, सुबह ने भी दस्तक दी,
दिल ने फिर तेरी यादों की चादर ओढ़ ली।
हमने चाहा कि तुझे भूलकर सो जाएँ,
पर तेरे ख़याल दिल से नहीं निकल पाए।

आँखें थककर भी तेरा इंतज़ार करती रहीं,
खामोश रात में तुझसे बातें करती रहीं।
हम तो बैठे रहे तेरी राहों में खोए,
रात भी बीत गई, मगर तुम नहीं आए।
-सूबा लाल "अंजाना"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
55 मिनट पहले

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