जहां प्रेम, विश्वास -समर्पण
सजा रहा हो जीवन को,
जहां पति-पत्नी का रिश्ते में
सम्मान और अपनापन हो,
जहां एक-दूसरे को प्यार करें,
मीठे वचनों से सम्मान करें।
छोटी-छोटी बातों को समझकर,
आपस में न कभी विवाद करें।
आपस की हर बात को समझे,
पत्नी पति के मन को पढ़े।
एक अकेला क्या कर पाए,
दोनों मिलकर जीवन गढ़ें।
सुख के दिन में साथ हँसें,
दुख में बनकर ढाल रहें।
जब भी कभी मुश्किल आए,
तो दोनों एक दूजे के साथ रहें।
धन कम हो तो धैर्य रखें,
सुख-सुविधा पर संयम हो।
दूसरों से तुलना को छोड़ें,
अपने सपनों के साथ में हों।
कभी प्रशंसा के फूल चढ़ाएँ,
कभी प्रेम से पास बिठाएँ।
जन्मदिन हो या साधारण दिन,
छोटी खुशियाँ मिलकर मनाएँ।
गलती हो तो क्षमा माँग लें,
मन के शिकवे आप निकालें।
क्रोध कभी जब बढ़ने लगे,
कुछ पल मौन रहकर के टालें।
न जीत किसी की, न हार किसी की,
दोनों की मुस्कान जरूरी ।
रिश्ता न साथ रहने का सिर्फ,
दिल से दिल का जुड़ना है जरूरी।
पति कभी पत्नी को समझे,
पत्नी भी पति की पीड़ा जाने।
दिनभर की थकान के बाद,
दोनों एक-दूजे को पहचानें।
घर के कामों में हाथ बँटाएँ,
एक-दूसरे का भार घटाएँ।
केवल अधिकार जताने से क्या,
कर्तव्य निभाकर प्रेम बढ़ाएँ।
न ताने दें, न व्यंग्य करें,
न बीती बातों का जिक्र करें।
जो बात दिल को चोट पहुँचाए,
उससे बचकर व्यवहार करें।
माता-पिता का मान रखें,
दोनों परिवारों का सम्मान करें।
रिश्तेदारों के कारण अपने,
आपस में न मनमुटाव करें।
बच्चों के आगे प्रेम दिखाएँ,
अच्छे संस्कार उन्हें सिखाएँ।
वे भी अपने जीवन में फिर,
मधुर संबंधों को अपनाएँ।
जब उम्र ढले,कमजोर हो तन,
बालों का रंग चाँदी सा हो।
तब भी हाथ पकड़ ये कहना,
तुम मेरे जीवन का उमंग हो।
जब बच्चे अपने घर बसाएँ,
दोनों अपना समय बिताएँ।
तब मिलकर पुराने मित्रों से,
जीवन में नई खुशियाँ लाएँ।
याद रहे, जीवन की संध्या में,
साथी ही सबसे बड़ा सहारा है।
जिसने जीवन भर साथ निभाया,
वह ही सबसे प्यारा है।
संदेश
प्रेम जताना कभी न छोड़ें,
विश्वास का दामन न तोड़ें।
एक-दूसरे की कमियाँ छोड़कर,
गुणों से रिश्तों को जोड़ें।
पति-पत्नी जब मित्र बन जाते हैं,
जीवन के हर दुख को हर जाते।
जहाँ प्रेम, विश्वास और सम्मान होवे,
वहीं घर तब स्वर्ग समान होवे।
-सूबा लाल " अंजाना "
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