दिल को इतना न पत्थर बनाओ सनम,
प्यार होता सदा भोलेपन से है।
दिल में थोड़ी जगह प्यार को दे दो,
जिंदगी खूबसूरत इसी से है।
रूठ जाओ मगर तुम मनाओ भी फिर,
प्यार बढ़ता सदा मान-मनुहार से।
एक-दूजे की भावनाएँ समझो,
रिश्ते चलते हैं विश्वास-व्यवहार से।
छोटी-छोटी गलतियाँ भुला दो,
मन न बाँटो कभी तकरारों में।
प्यार के दो मधुर बोल बोलो,
सुख छुपा है इन्हीं व्यवहारों में।
दिल अगर दिल से मिल जाएँ सनम,
फिर कहाँ कोई दूरी बचती है।
प्यार बाँटो तो बढ़ता ही जाए,
बिना बाँटे न बढ़ता कभी प्यार है।
-सूबा लाल "अंजाना"
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