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ज्ञान न रोका जा सकता है

                
                                                         
                            सत्य स्वयं प्रकाशवान है,
                                                                 
                            
कौन इसे छिपाएगा?
जहाँ ज्ञान का दीप जले,
तम कैसे टिक पाएगा?

जहाँ प्रश्नों की चिंगारी है,
वहीं विचार प्रखर होंगे,
जो सच पूछने का साहस रखते,
वही समय के स्वर होंगे।

शिक्षा पर यदि पहरा होगा,
तो ज्ञान कहां से आएगा?
जनता को अज्ञान में रखकर
विकास कहां से आएगा?

गरीब की झोपड़ी में भी
ज्ञान का दीप जलने दो,
जिसे मिला नहीं अवसर अब तक,
उसको भी आगे बढ़ने दो।

धन के बल पर ज्ञान न बाँटो,
सत्ता से मत तौलो शिक्षा;
जिस देश में सब पढ़ते हैं,
वहीं जन्म लेती है दीक्षा।

जब अधिकारों पर चोट पड़ेगी,
जन-जन मौन नहीं होगा;
सड़कों पर उठती हर आवाज़
कल का परिवर्तन बोएगा।

धन के बल पर ज्ञान न बाँटो,
सत्ता से मत तौलो शिक्षा;
प्रकाश किसी की जागीर नहीं,
सूरज कहाँ है रुक सकता?

हक की खातिर उठती आवाजें
सड़कों तक जब आती हैं,
हर आंदोलन की गूँज में
सोई चेतना जगाती हैं।

देश तभी सशक्त बनेगा,
जब हर बच्चा पढ़ पाएगा;
ज्ञान मिले जब सबको बराबर,
तभी नया भारत आएगा।

दीवारें चाहे जितनी उठें,
प्रकाश राह बना लेगा;
सत्य दबेगा कुछ पल शायद—
फिर सूरज बनकर निकलेगा।

ज्ञान न रोका जा सकता है,
न सत्य कभी दब पाएगा;
जिस मन में प्रश्न जगेगा,
वहीं नया सवेरा आएगा।
-सूबा लाल "अंजाना"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

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