प्रेम, विश्वास और अटूट रिश्ते की कविता
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भाई का भाई से प्यार रहे,
मन में मधुर व्यवहार रहे।
सुख-दुख में दोनों साथ रहें,
रिश्तों में सदा मिठास रहे।
बचपन की यादें प्यारी हैं,
कुछ खट्टी हैं, कुछ न्यारी हैं।
लड़ते-झगड़ते बड़े हुए,
फिर भी एक-दूजे के सहारे हैं।
एक की आँखों में आँसू हों,
दूजे का मन भी रोता है।
एक के चेहरे पर हँसी खिले,
दूजा भी खुशियाँ बोता है।
जब संकट की बदली छाए,
भाई ही भाई के काम आए।
हाथ पकड़कर साथ चलें,
हर मुश्किल को दूर भगाएँ।
धन-दौलत से बढ़कर रिश्ता,
प्रेम का अनमोल खजाना है।
भाई के मन में भाई के लिए,
सम्मान सदा बनाए रखना है।
न तुलना हो, न ईर्ष्या हो,
न मन में कोई दीवार रहे।
एक-दूसरे की बात समझें,
विश्वास भरा व्यवहार रहे।
गलती हो तो माफ करें,
कटु वचनों से बचकर रहें।
बैठकर मिलकर बात करें,
मन के शिकवे दूर करें।
एक की उन्नति, दोनों की हो,
एक की खुशियाँ सबकी हों।
भाई के घर में सुख बरसे,
मिलकर सबकी खुशियाँ बढ़ें।
प्रेम प्रगाढ़ तभी होता है,
जब मन में थोड़ा भी अहंकार न हो।
भाई, भाई का मान करे,
रिश्तों में कभी तकरार न हो।
बच्चों में भी संस्कार जगें,
वे प्रेम की राह पर सदा चलें।
चाचा-ताऊ के रिश्तों में,
अपनापन सदा निभाते चलें।
आने वाली पीढ़ी भी देखे,
भाईचारे का सुंदर रूप।
प्रेम की शीतल छाया में,
खिलता रहे परिवार का फूल।
याद रहे यह बात सदा,
भाई केवल नाम नहीं।
विपदा में जो साथ खड़ा हो,
उससे बढ़कर धाम नहीं।
आओ मिलकर शपथ उठाएँ,
भाईचारे की ज्योत जलाएँ।
प्रेम बढ़े हर दिन आपस में,
रिश्तों को खुशहाल बनाएँ।
भाई का भाई से प्यार बढ़े,
विश्वास का संसार बढ़े।
जितना बाँटें प्रेम परस्पर,
उतना ही परिवार बढ़े।
-सूबा लाल "अंजाना "
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