बेईमानी के मनके जब जीवन में जुड़ जाते हैं,
सच्चाई के मोती फिर आँखों से ओझल हो जाते हैं।
माला चाहे लंबी हो जाए, मान नहीं मिल पाता है,
झूठ-कपट के सहारे कोई विश्वास नहीं पाता है।
जहाँ ईमान बिके कौड़ियों में, कैसे देश बढ़ेगा?
जहाँ छल-कपट का राज चले, भविष्य कौन गढ़ेगा?
जिस घर में छल-कपट पलता, सुख-चैन वहाँ खो जाता है,
जिस समाज में झूठ बढ़े, सम्मान वहीं मिट जाता है।
देश की उन्नति रुक जाती, जब ईमान बिक जाता है,
मेहनत करने वाला भी फिर निराश नज़र आता है।
सत्य, प्रेम, ईमान के मोती जीवन में अपनाओ,
बेईमानी के मनके छोड़ो, सच्चा मान कमाओ।
-सूबा लाल ‘अंजाना’
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