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बाँटो प्रेम-खजाना

                
                                                         
                            कमा लो पुण्य और कुछ बाँटो प्रेम खजाना
                                                                 
                            
बहाना बिल्कुल कुछ भी ना करो।

बड़ी मुश्किल से मानव तन मिलता है खुद को संतों
कोटि जतन कर इसे बचाओ,व्यर्थ न समय गंवाना।
आओ सब मिली प्रभु का भजन करे मनमाना
बहाना बिल्कुल कुछ भी ना करो।

कमा लो पुण्य और कुछ बाँटो प्रेम खजाना
बहाना बिल्कुल कुछ भी ना करो।

स्वार्थ में दुनिया अंधी हो गई कुछ भी ना दिखता है
न्याय और सच्चाई देखो जगह जगह बिकता है
स्वार्थ में दिखे नहीं कुछ अपना और बेगाना
बहाना बिल्कुल कुछ भी ना करो।

कमा लो पुण्य और कुछ बाँटो प्रेम खजाना
बहाना बिल्कुल कुछ भी ना करो।

दुनिया की ये चमक दमक सब यही पे है रह जाना,
रख लो प्रेम,सच्चाई,धर्म और रख लो कर्म खजाना
विश्व विजेता सिकंदर का न रहा ठिकाना
बहाना बिल्कुल कुछ भी ना करो।

कमा लो पुण्य और कुछ बाँटो प्रेम खजाना
बहाना बिल्कुल कुछ भी ना करो।
-सूबा लाल ' अंजाना '
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

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