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कृष्ण जन्म कथा

                
                                                         
                            आई अष्टमी की रात थी,
                                                                 
                            
गगन घिर आए हो रही बरसात थी I

धरा मौन तूफान डरा सबको रहा था ,
कंस को क्या अपना शाप सता रहा था I

यहां से शुरू हुई कंस के अन्याय की कथा,
वर वधु को आशीर्वाद में मिली पीड़ादाई व्यथा I

देववाणी का भी सभी को आभास था ,
अंत आएगा कंस का सभी को यह विश्वास था I

बेड़ियों में जकड़े पड़े दो प्राणी थे कारागार में,
हो रहे थे सभी काम वितरित इस संसार में I

देखा हाल इनका आकाश भी रो पड़ा था ,
मेहंदी वाले हाथों को क्यों बेड़ियों में जकड़ा था I

बंद थे दोनों कारागार में विपत्ति उन पर आई थी ,
भाई कंस की यातनाएं बहुत ही पीड़ादाई थी I

पुत्रों को बचाने की खातिर गुहार खूब लगाई थी ,
पर सभी सातों पुत्र चढ़ गए बलि कंस के अन्याय की I

कारागार की पूरी दीवारें हो गई थी लहू से लाल ,
आठवें पुत्र का जन्म हुआ अब बनने कंस का काल I

मुक्त हुए सभी बंधन खुल गए थे कारागार,
खिल उठा सिंहासन भी जो था कंस का आधार I

उस काल कोठरी में जन्म लिया कृष्ण गोपाल ,
देवकी की कोख से जन्मे जगद- जगपाल I

मिलकर बोलो सब जय कन्हाई लाल की ,
जय बोलो देवकी नंदन कृष्ण गोपाल की I

-- सोनी गुप्ता
कालकाजी नई दिल्ली -19


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6 वर्ष पहले

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