दिन के उजाले में,
रात के सपने में,
हर रोज आते हो तुम,
कभी छांव बनके, तो
कभी फूलों पे बैठे भंवरों में,
अपना एहसास दे जाते हो तुम,
फिर भी मानों,
ऐसा लगता है कि
मुझसे कोशों दूर हो तुम,
न चाहते हुए भी सांसों में बस गए हो तुम,
पास होके भी दूर चले जाते हो तुम,
नजरें चुरा के,
मुस्कुरा कर, मुझे छेड़ते हो तुम,
बातों ही बातों में बहुत कुछ कह जाते हो तुम,
कभी तो पास आया करो,
अनजानी-सी एहसासों को
समझाया करो
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