दोस्ती की थे ये दास्ताँ
हर पल साथ रहने का वास्ता
बो बातें जो वेदो की थी की गहरी मित्रता समान गुण वाले व्यक्तियों मे ही होनी थी
कुछ ऐसे ही हमारी मुलाक़ात हुयी
मुलाक़ात हुयी , बात हुयी
कुछ ऐसे ही हमारे जीवन की शुरुवात हुयी
अनजाने की बातें जानने मे मददगार हुयी
एक दूजे के सांग रेहने की खुवाईश हुयी
कुछ यूँ ही हमारी मुलाक़ात हुयी
जो लम्हे साथ बिताते थे
यादो के पन्नों पर उन्हें ही सजाते थे
क्या दिन होते हैं बो ज़ब हम उनके साथ बैठ कर यूँ ही मुस्कुराते हैं
कुछ यूँ ही हमारे दिन बीते
कुछ ऐसे ही मित्रता ओर गहरी हुयी
कुछ तो बात हैं उसमे
जो हर वक़्त उसी की चाहत हुयी।
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