हम ऐसे समाज के हिस्से हैं
जहाँ माँ बाप की इज्ज़त बेटी के हाथ में
बेटी के साथ कुछ गलत हो
चाहे सड़क में हो या उसके घर या ससुराल में
माँ बाप के इज्जत में बट्टा लग जाता है
उनकी नजरें शर्म से झुक जाती है
वो किसी से नजर मिलाकर
बात नहीं कर पाते
अगर वो कुआँरी है तो उसकी
चिंता करते हैं
शादीशुदा है तो ससुराल पक्ष
को खुश रखने की चिंता करते हैं
ये तो उनकी इज्जत का सवाल
बन जाता है
लेकिन जायदाद के कागजात
सब बेटों के हाथ में होते हैं
वो कुछ भी गलत करें तो
कोई फर्क नहीं पड़ता
उससे उनकी इज्जत में
कोई दाग नहीं लगता
दहेज उत्पीड़न का वो
बहिष्कार नहीं करते
दहेज प्रथा को बढ़ावा देते हैं
बहू को मानसिक तनाव और
शारिरिक कष्ट देते है
बेटा की हर गलती माफी के काबिल है
बेटे की उद्दंडता पर नहीं कोई मलाल है
धिक्कार है ऐसे समाज पर
धिक्कार है ऐसे विचार पर
- सीमा केडिया
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