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सपने में गाँव

                
                                                         
                            पहले गाँव में सपने देखते थे
                                                                 
                            
अब सपने में गाँव....
यही तो है वक़्त का पड़ाव...
- सिद्धार्थ गोरखपुरी
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एक वर्ष पहले

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