खुशियां मना रहे हत्यारे
खेटकी बने अधर्मी सारे,
रोते बिलखते देख हमे
मुस्कुराते हत्यारे।
बोलकर जिस ने कांड किया
लोग भी देख हुए बेचारे,
छल, कपट, विश्वासघात करके
नादान बने फिरते है सारे।
चेहरा सबका सामने आया
जिन्होंने ये चाल चला,
लालची, कुलघाटी जो बने
पाप का ये खेल खेला।
काश आप होते पापा।
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