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अधिकार है

                
                                                         
                            कितना उपहास है
                                                                 
                            
एक के खातिर,
करोड़ो का हक मारे
और चले चल रहे शातिर।

शिक्षा का अधिकार सबको
ये संविधान का मान है,
फिर ये भेद - भाव कैसा?
ये तो जातिय अपमान है।

राष्ट्र भविष्य सड़को पर पड़ा
क्या ये लगता है सही?
उनके बातों को सुने
कि उन्हें ये भी हक नहीं।

आज जो भी हो रहा
प्रलय का सचेत है,
यदि नहीं संभाले अभी तो
विनाश होने का संकेत है।
-श्याम सुंदर सिंह
 
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एक घंटा पहले

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