कड़ी धूप में छांव है वो,
ईश्वर का दिया बहुमूल्य रत्न 'मां' है वो।
घर संवारती, परिवार संभालती,
बच्चे को हर मुश्किल से बचाती।
संतान को समाज के नियम बतलाती,
उसे सही-गलत का फर्क समझाती।
संतान को सदा खुश देखना चाहती,
अपनी सफलता से अधिक उसकी सफलता पर गर्व मनाती।
भले-बुरे से अवगत करवाती,
जीवन का सही मार्ग बतलाती।
उसका अपने संतान पर विश्वास अनूठा है,
मां का स्नेह हर मिष्ठान से अधिक मीठा है।।
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