आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

माँ की ममता

                
                                                         
                            माँ ही मन्दिर, माँ ही मस्जिद, माँ ही गुरु का द्वार है
                                                                 
                            
धन्य है तेरी कृपा मेरी माँ तू ईश्वर का अवतार है

होता है हर मुश्किल का हल तू ज्ञान का भण्डार है
दे देती है मेरे हर प्रश्न का उत्तर सर्वोत्तम तेरे विचार हैं

निर्मल है माँ तेरी ममता पावन तेरा प्यार है
मिलता है माँ तुझसे जीवन तुझसे ही संसार है

घर होता है माँ तुझसे रोशन तुझसे ही परिवार है
बाँध रखा है सबको एक सूत्र में ऐसा तेरा प्यार है

बातें तेरी प्यारी-प्यारी डांट भी तेरी सबसे न्यारी
होती है जब तू मुझ पर गुस्सा तेरे गुस्से में भी प्यार है
धन्य है तेरी कृपा मेरी माँ तू ईश्वर का अवतार है

देखे हैं बदलते हमने हर उम्र में रिश्ते
नहीं बदलता जो जीवनभर वो माँ का ही प्यार है

त्याग की तेरे कोई नहीं है सीमा जाने सब संसार है
कद्र करे ना जो माँ की अपनी जीना उसका बेकार है

शुभम् , मुरादाबाद
उत्तर प्रदेश
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर