आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

तुम संग जीना है

                
                                                         
                            अपने दिल के अरमानों को तुमसे छुपा रखा है,
                                                                 
                            
तुमसे कहूँ ओर तुम रूठ न जाओ, इसलिए ही अपने दिल को समझा रखा है,
यूँ न समझना कि मेरी शादी नहीं हो रही
किसी और से न हो जाए मेरी, इसलिए घर वालो को भी पागल बना रखा है,
तुम से शायद नहीं हो पाएगी 
बस तुम्हारी यादों के संग जी लूँ,
इसलिए खुद को ऐसा बना रखा है,
कभी कोई आए ऐसी परिस्थिति तो दौड़ी चली आना, मै अपना लूंगा
नहीं रहने दूंगा उदास तुम्हें, अपना बना लूंगा।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
46 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर