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वक़्त गुज़र जाने के बाद

                
                                                         
                            तुम ही ने तो खो दिया मुझे पाने के बाद,
                                                                 
                            
मेरी क़ीमत समझ रहे हो मेरे जाने के बाद?

कोई भी राह जीने की मिली ही नहीं तुम्हें,
लौट आए हो क्यों आशियाँ उजड़ने के बाद?

तग़ाफ़ुल करना मेरी सीरत में शामिल नहीं जानाँ,
कोई शिकवा किया न अदावत तेरे जाने के बाद।

बस यही पूछता है मेरा मायूस दिल तुमसे,
क्यों आए हो मौसम-ए-मोहब्बत बीत जाने के बाद?

लौट आए हो पर दरम्याँ दूरियाँ रहेंगी सदा,
ये समझोगे तुम भी वक़्त गुज़र जाने के बाद।
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1 hour ago

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