ममता की मूरत, करुणा की धारा, माँ ने जग को प्रेम से सँवारा,
गोद में स्कंद, मुख पर उजियारा, माँ से ही रोशन जग सारा।
कमल के आसन पर माँ विराजें, भक्तों के बिगड़े काज सँवारें,
जो भी सच्चे मन से पुकारे, माँ उसके जीवन में खुशियाँ उतारें।
सिंहवाहिनी, रूप निराला, माँ ने हर संकट को टाला,
तेरी कृपा का मिले सहारा, पार लगे जीवन की धारा।
मन में भक्ति की ज्योत जला दे, सूने मन में फूल खिला दे,
दुख की घटा को दूर हटा दे, खुशियों की बरसात करा दे।
तेरी ममता चाँदनी जैसी, तेरी महिमा रोशनी जैसी,
तेरे चरणों में दुनिया सारी, तू ही सबकी पालनहारी।
जब-जब मन पर संकट छाए, कोई राह न नज़र में आए,
तेरा नाम हृदय में आए, आशा का दीपक जल जाए।
माँ स्कंदमाता, कृपा बरसाना, भटके मन को राह दिखाना,
हर घर में सुख-शांति लाना, प्रेम का दीप सदा जलाना।
तेरे चरणों में शीश झुकाएँ, प्रेम से तेरा नाम बुलाएँ,
नवरात्रि के पावन अवसर पर, जय-जयकार तेरी ही गाएँ।
जय माँ स्कंदमाता, जय जगदम्बे, महिमा तेरी न्यारी,
तेरी कृपा से महके जीवन, माँ तू जग की पालनहारी।
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