पीताम्बर धारण कर माँ, जब सिंहासन पर आती हैं,
दुष्टों की हर चाल को पल में निष्फल कर जाती हैं,
तेरे नाम की गूँज जहाँ हो, भय वहाँ टिकता नहीं,
तेरी कृपा की छाँव मिले तो विपदा फिर दिखती नहीं।
पीली आभा, पीला अम्बर, पीले फूलों का श्रृंगार,
माँ बगलामुखी के चरणों में झुकता सारा संसार,
तेरी शक्ति से काँप उठे हर अन्याय का अंधकार,
तेरी दृष्टि पड़े जिस पर, मिट जाए उसका संताप अपार।
जब राहों में बाधाएँ हों, माँ तू राह दिखाती है,
टूटे मन में आशा बनकर, नई शक्ति भर जाती है,
सच्चे मन से जो पुकारे, उसकी लाज बचाती है,
माँ बगलामुखी अपने भक्तों को हृदय से अपनाती है।
ना धन माँगूँ, ना वैभव माँगूँ, ना कोई संसार माँगूँ,
बस तेरे चरणों में माँ, अटूट सा प्यार माँगूँ,
जब तक साँस चले मेरी, तेरा नाम जुबाँ पर आए,
माँ बगलामुखी की कृपा से जीवन सफल हो जाए।
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