आज हनुमान ने राम को पुकारा,आँखों में था दर्द, हृदय ने सहारा।
जो हर पल कहते थे-राम ही राम,आज उसी मुख से निकला-आओ मेरे राम।
संकट में जिसने जग को संभाला,हर दुख को जिसने हँसकर टाला,
आज उसी वीर का मन था हारा,आज हनुमान ने राम को पुकारा।
न शक्ति माँगी, न माँगा मान,
न चाही दुनिया की कोई शान,बस एक बार प्रभु मिल जाएँ,तो ये नयन फिर मुस्कुराएँ।
बोले बजरंगी-हे रघुराई,
आज बहुत याद तुम्हारी आई,हर पल तुमने मेरा हाथ थामा,आज अकेला क्यों हूँ मैं, हे राम?
राम नाम था जिनकी साँसों में,राम बसे थे जिनकी धड़कनों में,
आज वही नाम बना सहारा,
आज हनुमान ने राम को पुकारा।
कहा-प्रभु! मैं आपका ही दास,आप बिना सूना मेरा हर श्वास,दुनिया चाहे मुझे वीर कहे,पर आपके बिना मैं कुछ भी नहीं।
इतना सुनकर नभ भी रो पड़ा,सागर का जल जैसे थम गया,और दूर कहीं से आई आवाज़-हनुमान, मैं कब तुमसे दूर हुआ?
जिसे भक्त समझता था अपना सहारा,वही तो था भक्त का सबसे प्यारा।
राम मुस्कुराए, मिटा अँधियारा-तूने मुझे पुकारा नहीं,मैंने तो हर पल तुझे पुकारा।
आज भक्ति ने भक्ति को पुकारा,आज दास ने पाया अपना प्यारा।
राम जहाँ हैं, हनुमान वहीं हैं,
और हनुमान जहाँ-राम वहीं हैं।
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