मिट्टी की खुशबू में पलती,
आँखों में सपने हजार,
गाँव की नारी बढ़ रही है,
बदल रहा उसका संसार।
चूल्हे तक सीमित अब नहीं,
उसके सपनों की उड़ान,
हुनर के दम पर आज बना रही,
अपनी अलग पहचान।
बेटा-बेटी एक समान हो,
हर घर का यह विचार हो,
बेटियों को भी मौका मिले,
उनके सपनों का संसार हो।
एक महिला जब आगे बढ़ती,
पूरा परिवार संवरता है,
और उसी के साथ-साथ
पूरा गाँव भी आगे बढ़ता है।
मेरी बस इतनी-सी इच्छा,
हर बेटी को सम्मान मिले,
अपने सपनों को जीने का
हर बेटी को अधिकार मिले।
-श्रेया अवस्थी
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