हे कृष्ण! हे केशव!हे कृपाल!
हे गोविन्द! हेे गोपाल!
श्रीकृष्णजन्मभूमि
कृष्णानगरी, मथुरा,
कैसी छटा बिखेर रही है आज
आपकी पावन जन्मस्थली
ऊँचे सदन में रहन तुम्हारा,
संग में रमती राधा-रानी।
जमुना के नीरे-तीरे
द्वारकाधीश में तुम विराजे
बाँके बिहारी में,
जागृत दर्शन देते हो योगेश्वर
श्रीकृष्ण बलराम इस्कॉन में
आधुनिक साज-सज्जा
उत्साह उल्लास उमंग अर्चन कीर्तन,
निधिवन में रासलीलाएं
संग में रमती राधा-रानी।
आज,
प्रेममंदिर, छःशिखर, श्रीरंगजी, विश्रामघाट
राधारमण राधाबल्लभ राधाामाहन
मंदिर-मंदिर तुम जागृत,
संग में रमती राधा-रानी।
गोकुल, गोवर्धन, नंदगाँव, बरसाना, दाऊजी
मनोरम मनोहारी अनुपम छवि तुम्हारी
हे गिरधारी, हे बनवारी
तुम्हीं पथ प्रदर्शक हो चिरकाल से,
तुम्हीं साक्षात् हो इस कलिकाल में,
संग में रमती राधा-रानी।
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