चलो चले पिकनिक मनाने ,रसगंडा नहीं माड़ा ।
हर मौसम में मन बहलाओ,गर्मी हो या जाड़ा ।।
जहाँ चले जलजलियावाली,माँ है महिमावाली ।
श्रृंगी ऋषि की तपोभूमि है, सुख शान्ति देनेवाली ।।
कहे पुजारी माँ प्रकटी है,तोड़ पूरा पहाड़ा ।
चलो चले पिकनिक मनाने,रसगंडा नहीं माड़ा ।।
जहाँ चले आदिमानव काल की,पर्वत काट गुफाएँ ।
श्रद्धालु माँ दर्शन आए,नारियल,रेवड़ी,फूल चढ़ाएँ ।।
गुफा मध्य मंदिर में लोग,मन्नते रखने आ संसारा ।
चलो चले पिकनिक मनाने,रसगंडा नहीं माड़ा ।।
जहाँ चले रावण की गुफा है,खूब है रमणीय स्थल ।
शेषनाग के फन से शिव पर,झरे जलजलिया जल ।।
कई पीढ़ियो से सुनते हैं, रूके नहीं यह धारा ।
चलो चले पिकनिक मनाने,रसगंडा नहीं माड़ा ।।
जहाँ चले सैलाब उमड़ते,मकर सक्रान्ति के दिन ।
पूजा,हवन,अनुष्ठान होते हैं,सावन में हर दिन ।।
यहाँ चरम पर आस्था देखो,छोड़ काम सब सारा ।
चलो चले पिकनिक मनाने,रसगंडा नहीं माड़ा ।।
जहाँ नज़ारा है खूबसूरत,चारों ओर है जंगल ।
सदानीरा झरने को देख,सबका मन है चंचल ।।
दूर-दूर से दर्शक आते,अपने साधन भाड़ा ।
चलो चले पिकनिक मनाने,रसगंडा नहीं माड़ा ।।
जहाँ चले हम दृश्य देखने,खुशी मिलेगी दूना दून ।
हरी-भरी वादियों के बीच में,शान्ति और सकून ।।
खाने-पीने की मस्त व्यवस्था ,पिओ चाय काढ़ा ।
चलो चले पिकनिक मनाने,रसगंडा नहीं माड़ा ।।
जहाँ चले हम ग्रुप के साथ,जगह देव की मूरत ।
यकीं नहीं होता है दिल को,प्रकृति अति खूबसूरत ।।
अद्भुत रूप सवाँरा है,जो लगता सबको प्यारा ।
चलो चले पिकनिक मनाने,रसगंडा नहीं माड़ा ।।
-शोभनाथ सिंह यादव
एनटीपीसी सिंगरौली,शक्तिनगर ,सोनभद्र (उ0प्र0)।
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