बिन सोचे समझे उसपे ऐतबार तुम ना करना,
जो दिल को खेल समझे इजहार तुम ना करना।
हरजाई लड़कियां हैं ऐ दोस्त आज कल की,
सूरत पे तुम न जाना और प्यार तुम ना करना।
दिल से मैं लिख रहा हूँ सब दिल के मामलों को,
बेजार तुम ना होना बेजार तुम ना करना।
रो-रो के आज कस्ती पतवार से कहे हैं।
वह बेवफा का घर है इसे पार तुम ना करना।
ग़ज़लें "सहर" की सारी सबको यही सिखाये,
हर वक्त के सफर को बेकार तुम ना करना
-शिवसागर"सहर"
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