उतरकर सितारे, एक बार आएँगे तेरे सामने,
झटक मत देना कहीं पल्लू उठाकर।
न लौटेंगे अगर इस बार रूठे, फिर फ़लक से,
नज़र आएँगे सामने, दिन-रात आकर।
न छूने का भरम रखना, न पाने की इरादा,
वो हो जाएँगे प्यारे, हर किसी को दूर जाकर।
सितारों को ज़माने का न डर है, न भरोसा,
तुम्हारे पास आएँगे, सितारे दूर जाकर।
सितम करते हैं, फिर भी तुम ख़ुद को कैसे बचाओगे?
लुभाएँगे सितारे, फिर से तुमको दूर जाकर।
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