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दास दर्द की बीन बजाने आये यारों के यार. .

                
                                                         
                            लो रस्मे आदाब निभाने आये यारों के यार
                                                                 
                            
दर्द भरी सौगात चुकाने आये यारों के यार

मान लिया हमने उनको सरताज हसींनों का
अपना अपना रूप दिखानेआये यारों के यार

हम मेहमान हैं चार दिनों के इस दुनियां में
बीती सदियाँ वापस लाने आये यारों के यार

जिनकी खुशबू से हम थे हरदम मालामाल
उन फूलों को ओह चुराने आये यारों के यार

काश लम्हे कुछ हमको तुम देते फुरसत के
कड़वी अपनी डांट पिलाने आये यारों के यार

मुश्किल से खामोश हुए हैं अब गम के नाग
दास दर्द की बीन बजाने आये यारों के यार. .
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1 hour ago

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