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ठान,कर ,हर क्षण के पल।

                
                                                         
                            बीत गये वो पल,
                                                                 
                            
जब मैं था अपने स्वर्णिम कल।
कल-कल करके चक्र चला ,
चक्र सा घुमा कल ,
अब न आए वो पल ।

चल समय पर ज्ञानालय,
उठ समय पर कल ।
कल-कल के चक्कर में ,
बीत गए वो पल ।

न जान पाया वो मूल्य,
जिसमें मिल जाता वो कल।
अब बैठ गया मेरा मन ,
जब चल गए वो स्वर्णिम पल।
चल आज करते है एक प्रण,
पालन करते उसको हर पल।
न बीतने देंगे यू ही अब पल,
चलो बनाए फिर एक स्वर्णिम कल ,
न टाल कल को कल ,
ठान,कर ,हर क्षण के पल।
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7 घंटे पहले

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