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परन्तु सुगन्ध से जन मन हर्षाते है

                
                                                         
                            जब मैं चला उस राह,
                                                                 
                            
भूल गया सब चाह।
चाह से याद आता है ,
क्या यह राह वही जाता है ।
राहों में काटे बहुत मिले
क्या काटो को भी काटे मिले

काटो से याद आती है
फूलों के पथ पर भी काटे मिले
तभी जाकर फूल सुगन्ध से खिले
फूल तो मुरझा जाते है
परन्तु सुगन्ध से जन मन हर्षाते है
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एक दिन पहले

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