ओ आती थी सपनों में,
उसे दिल में बसाया था,
बस वो ही लगती थी अपनी,
बाकी सब पराया था ।
कहने को डरता था दिल ये बेचारा,
ये उसकी मोहब्बत का मारा था,
दर बदर भटकता था दिल ये मेरा,
अब तो बस उसकी यादों का सहारा था,
मन कहता था उसकी जुल्फो में खो जाऊॅ,
भूल कर इस पूरी दुनिया को,
उसके दिल में एक छोटा सा अाशियाना बनाऊॅ,
बेसहारा दिल को अब उसकी यादों का सहारा हो गया,
फिर एक दिन डर के दिल ने कह दी बात अपनी ,
और फिर से दिल मेरा अावारा हो गया,
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