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मन की बाते

                
                                                         
                            कुछ बातें काग़ज़ पर ही अच्छी लगती हैं,
                                                                 
                            
लोगों के सामने कह दो तो तमाशा बन जाती हैं।
हमने भी अब ख़ामोशी को अपना हथियार कर लिया,
क्योंकि यहाँ सच्ची बातें अक्सर लोगों को चुभ जाती हैं।

जिसे अपना समझकर दिल का हाल सुनाया था,
उसी ने मेरे दर्द को बाज़ार में सरे आम सजाया था।
अब न शिकायत है, न किसी से कोई सवाल,
बस अब मुस्कुरा देता हूँ, जब कोई पूछता है कोई सवाल।

यहाँ चेहरे साफ़ रखने से कोई अपना नहीं होता,
हर मीठा बोलने वाला सच्चा नहीं होता।
कुछ लोग आईना लेकर घूमते हैं दुनिया में,
मगर अपने चेहरे से उनका सामना नहीं होता।

हमने तो बस सच लिखा था अपनी डायरी में,
लोगों ने उसमें भी अपने मतलब ढूँढ लिए।
जो कल तक मेरे दर्द पर हँसते थे,
आज वही मेरे ख़ामोश रहने के मतलब पूछने लगे।

अब दर्द भी है, तो दिखाऊँगा नहीं,
टूट जाऊँगा मगर किसी के सामने झुकाऊँगा नहीं।
जिसे जाना है, वह रास्ता अपना चुन ले,
मैं किसी को रोकूँगा नहीं—और लौटकर बुलाऊँगा नहीं।
- शिवम यादव
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

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