उम्र भर डरते रहे तुम्हे खोने से
भिन्न लिबास , झट रोने से
खामोशी रख सहेजने के 'इज्तिहाद'किए
नित्य जलाए आशा के बुझे दिये
ढूँढा जग सारा
हर नज़र टटोली
बेनाम होकर भी है बदनाम
कभी तो मिल जाती
ताउम्र खोजते फिरे हम तुम्हें पहचान!
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