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ज़िंदगी, ख़्वाहिश है किसी की

                
                                                         
                            किसी की ज़िंदगी, यहाँ ख़्वाहिश है किसी की।
                                                                 
                            
किसी को क्या ख़बर, आजमाइश है किसी की।

ज़िंदगी जी है किसी ने, तो यहाँ काटी किसी ने,
किसी को मिला तख़्त, तो हुई नुमाइश है किसी की।

बिना माँगे किसी को मिला शख़्स, ज़िंदगी रंगने वाला,
मिले कोई ऐसा हमसफ़र, ये गुजारिश है किसी की।

किसी की ज़िंदगी बर्बाद कर्मों से हो, जरूरी नहीं,
कहीं तकदीर की मार, तो कहीं साजिश है किसी की।

किसी की ज़िंदगी में, खुशियाँ नहीं मुमकिन, हर क़दम,
गर खुशहाल है ज़िंदगी, तो फिर सिफारिश है किसी की।

ये मौसम भी बँटे हैं, हर किसी की ज़िंदगी में अलग,
किसी को दे राहत तो कहीं बर्बादी बारिश है किसी की।

मैंने ज़िंदगी को, उम्र से ज्यादा जिया, पर लिखा नहीं,
आज लिख रहा हूँ क्योंकि, फ़रमाइश है किसी की।

 
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46 minutes ago

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