मेरे देश की सरहदों का सिपाही,
उठा शीश दुश्मन से ये कह रहा है ।
तुम्हारे वतन में लहू बह रहा है,
हमारे लहू में वतन बह रहा है ।।
ये सच है तुम्हारे ही घुसपैठियों से,
हमारा तो गुस्से में तन जल रहा है ।
हमारा तो केवल ये तन जल रहा है,
तुम्हारा तो सारा वतन जल रहा है ।।
भले पार सीमा के आतंकियों से,
हमारे चमन का अमन ढह रहा है;
हमारा तो केवल अमन ढह रहा है,
तुम्हारा तो पूरा वतन ढह रहा है ।।
- शिवम कुमार 'आज़ाद'
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