गौरी मत बन तू चण्डी बन
अब मौत की नींद
सुलाने का वक्त आ गया है
अब आँसू मत बहा मेरी बहन
अब रोने का नहीं
रुलाने का वक्त
आ गया है
इन नामर्दो के खतिर
मत बन ठन
इन्हे सबक सिखाने का
वक्त आ गया है
अब बराबर तो तू आ गयी है
फिर क्यों है ये उलझन
अब ऊची उडा़न तू बन
इन्हे निचा दिखाने का
वक्त आ गया है
नोच लेते हैं आबरु तेरी
तुझे कमजोर जानकर
अब इस मौत को
मत अफ़ना मेरी बहन
अब कर तू
इन दुष्टों का रक्त स्कन्दन
अब मरने का नहीं
इन्हे मिटाने का वक्त आ गया है
अब आत्महत्या करना
बन्द कर मेरी बहन
अब आवाज उठाने का
वक्त आ गया है
कलम मेरा अब दहाड़ भर रहा है
अभी तेरा भाई जिन्दा है मेरी बहन
आ गया है साथ तेरे
लेके अपना कलम
अब कलम चलाने का
वक्त आ गया है
इस समाज के गन्दे सोच को
मिटाने का वक्त आ गया है
कब तक कतराती रहेगी तू
अब तेजाब से जलने से
अब जलने का नहीं
जलाने का वक्त आ गया है
इन्साफ की आवाज बन मेरी बहन
अब दहेज के नाम पर
फंदे पर लटकने का मत बना मन
अब ऐसे निचकटों को
लात मार के जाने का वक्त आ गया है
गैरी मत बन तू चण्डी बन
अब रोने का नहीं
रूलाने का वक्त आ गया है ।।
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