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चीखो चिल्लाओ और आवाजदार हो जाओ

                
                                                         
                            खबर गर है तो ख़बरदार हो जाओ l
                                                                 
                            
उठो, जागो और असरदार हो जाओ l
नहीं मिलता सोने वाले को यहाँ कुछ,
पाना है तो दिल से तलबगार हो जाओ l
सियासत अंधी हो चुकी, हुक्मरां भी बहरे हैं,
चीखो, चिल्लाओ और आवाजदार हो जाओ l

शशि सुमन


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले

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