एक नहीं दो दो मात्राएं
नर से बढकर कही नारी,
ॠचाएं रचे,गायत्री बने
आदर्श सीता लक्ष्मी नारी।
सूर की यही गोपी बनती
प्रसाद की इडा और श्रृद्धा
कालिदास की मार्गदर्शक
ललना पलना मां विशुद्धा।
शिवाजी अभिमन्यु इसी से
एकलव्य उदयसिंह यहीं से
यमराज से लड़ती सावित्री
क्रान्तिसहयोगी दुर्गा इन्हीं में।
सर्वाधिक स्नेह दुलार नारी में
मीरा महादेवी इन्दिरा नारी में,
सरोजिनी लता साइना यह है
सुभाष भगत बनाये वो नारी में।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X