देख तमाशा दिल्ली का
अनदेखा मत कर देना तुम
भांड लगे वो शायद तुमको
हल्के में ना लेना तुम
कुरुक्षेत्र है कलयुग का
षड़यंत्र बड़ा ये गहरा है
आहट है ये खतरे की
हर ओर लगा अब पहरा है
देश विरोधी सारी शक्ति
तुमको बांटने आएगी
टुकड़े टुकड़े गैंग के आड़े
मीठा जहर पिलाएगी
चिंतन करके आगे बढ़ना
मुर्ख नहीं तुम ज्ञानी हो
पावनभूमि के वंशज तुम
शूरवीर और ध्यानी हो
-शशिकांत शांडिले
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