सब कहते हैं—
“ससुराल औरत का अपना घर है।”
पर वो घर
कभी मकान लगता है,
कभी जेल।
जहाँ औरत
पत्थरों की दीवारों में
अपना ही खून मिलाकर
ताजमहल बनाती है।
पर उसमें दफ़न
उसकी अपनी ज़िंदगी होती है।
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