बचपन में मां ने हमको पाला है
मेरी मां का प्यार निराला है
मां के प्यार में, कुछ शब्द हमने कहे हैं
मेरी मां ने कष्ट बहुत सहे हैं
मैं हूं लाड़ला उनका, वो मेरे पीछे घूमा करती थी
बचपन में कर मेरे चूमा करती थी
कभी रूठे हम, तो कभी हंस रहे हैं
मेरी मां ने कष्ट बहुत सहे हैं
बचपन में हमने मां को बहुत सताया है
फिर भी दुलार से मां ने हमको खिलाया है
हमसे चुपके, उनके आंसू बहुत बहे है
मेरी मां ने कष्ट बहुत सहे हैं
मेरी मां का प्यारा सा चेहरा था
मैं उनका आसमां सुनहरा था
उनके प्यार बिना, हम अधूरे रहे हैं
मेरी मां ने कष्ट बहुत सहे हैं
बच्चों का मां से अलग नाता होता है
हर मां का प्यार नौ महीने ज्यादा होता है
इस जग में कुछ बिना मां के रहे हैं
मेरी मां ने कष्ट बहुत सहे हैं
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X