न हम भी किसी से रुठे होते
न हमारे वादे भी झूठे होते
हमें भी कोई नया मिलता
मेरे भी साथ कोई फूल खिलता
हमें भी काश कोई समझता
हम भी तेरे सपनों में खो जाते
कुछ बीते पल हमको भी याद आते
मैं भी तुझपे मरा करता
हमें भी काश कोई समझता
हम भी उपवन में तेरे पीछे भागते
तेरी खातिर रातों में जागते
छोड़ अपना काम, यूं ही सजा करता
हमें भी काश कोई समझता
हम भी आसमां से तारे तोड़ लेते
तुझसे नया रिश्ता जोड़ लेते
तेरा भी चेहरा चन्दा सा चमकता
हमें भी काश कोई समझता
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