महाशून्यप्रकाशिनि देवि, आदिसृष्टिविधायिनि।
हिरण्यगर्भजननि, विश्वयोनिस्वरूपिणि॥
निराकारस्वरूपे त्वं, साकारजगदम्बिके।
चिदानन्दघनशक्ते, विश्वबीजस्वरूपिणि॥
अणोरणीयसि शिवे, महतोऽपि महीयसि।
कालदेशातिगे मातः, त्रिगुणातीतरूपिणि॥
ब्रह्माण्डकोटिजननि, विश्वचैतन्यरूपिणि।
आद्ये कूष्माण्डरूपेऽम्ब, परब्रह्मस्वरूपिणि॥
-सनातन मुकुंद
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