जय चंद्रघंटा, जय कल्याणी,
जय शिवप्रिया, जगन्महारानी।
भाल विराजित चंद्र मनोहर,
सिंहवाहिनी, महिमाधारिणी॥
दशभुजा, आयुध-धारिणी,
दुष्ट-दलन, संकट-निवारिणी।
घंटानाद से दिशाएँ जागें,
शौर्य-ज्योति से तम सब भागें॥
जय जय चंद्रघंटा भवानी,
जय अम्बे, जय जगकल्याणी।
भय हर लो, सद्ज्योति जगा दो,
माँ! शिवमय जीवन बना दो॥
स्वर्णिम आभा, दिव्य विभूति,
शौर्य-करुणा की अद्भुत मूर्ति।
खड्ग, त्रिशूल, धनुष की शोभा,
धर्म-संरक्षण व्रत की प्रभा॥
सिंहनाद से दुष्ट थर्राएँ,
सत्य-धर्म के दीप जगमगाएँ।
अभय-मुद्रा आश्वस्त करे माँ,
करुणा से अंतर्मन भर दे माँ॥
जय जय चंद्रघंटा भवानी,
जय अम्बे, जय जगकल्याणी।
भय हर लो, सद्ज्योति जगा दो,
माँ! शिवमय जीवन बना दो॥
पर्वत, पवन, गगन, जल, धरती,
तेरी महिमा नित ही गाती।
कण-कण में चैतन्य तुम्हारा,
सृष्टि में फैला तेज तुम्हारा॥
घंटानाद अंतर्मन गूँजे,
सोई चेतन-ज्योति पुनः जागे।
मोह-मलिनता दूर भगाओ,
सत्य-बोध का दीप जलाओ॥
जय जय चंद्रघंटा भवानी,
जय अम्बे, जय जगकल्याणी।
भय हर लो, सद्ज्योति जगा दो,
माँ! शिवमय जीवन बना दो॥
दीन-दुःखी के कष्ट निवारे,
भक्तों के संकट सब टारे।
श्रद्धा, साहस, शील बढ़ाओ,
सेवा का सद्भाव जगाओ॥
क्रोध थमे, करुणा की धारा,
प्रेम बने जीवन का सहारा।
शक्ति बने जनहित का साधन,
करुणा बने हृदय का चंदन॥
जय जय चंद्रघंटा भवानी,
जय अम्बे, जय जगकल्याणी।
भय हर लो, सद्ज्योति जगा दो,
माँ! शिवमय जीवन बना दो॥
हे गिरिजे! वंदन स्वीकारो,
भक्त-हृदय में प्रेम सँवारो।
चरण-कमल में प्रीति हमारी,
कृपा बनी रहे माँ तुम्हारी॥
घंटानाद मंगलमय गूँजे,
भक्ति-ज्योति अंतस में जले।
शक्ति, शांति, सद्बुद्धि-दात्री,
जय चंद्रघंटा, विश्व-विधात्री॥
जय जय चंद्रघंटा भवानी,
जय अम्बे, जय जगकल्याणी।
भय हर लो, सद्ज्योति जगा दो,
माँ! शिवमय जीवन बना दो॥
- सनातन मुकुंद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X